जबलपुर में दिल का दौरा पड़ने से लंकेश की मौत हो गई, जबलपुर के पाटन क्षेत्र में रहने वाले 72 साल के लंकेश उर्फ संतोष नामदेव को हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। संतोष नामदेव न केवल जबलपुर बल्कि मध्यप्रदेश में ‘लंकेश’ के नाम से जाने जाते थे, लंकेश प्रदेशभर में रावण की उपासना करने के लिए प्रसिद्ध थे। पेशे से टेलर रहे संतोष नामदेव का रावण के प्रति इतना लगाव और भक्ति थी कि उन्होंने अपनी दुकान का नाम भी श्री लंकेश टेलर रखा था, यही नहीं लंकेश ने रावण से प्रभावित होकर अपने दोनों बेटे का नाम भी मेघदूत और अक्षय रखा था। वे बीते कई दशकों से पाटन में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा करते आ रहे थे।
विसर्जन के दिन ही पड़ा दिल का दौरा।
संतोष नामदेव अपने साथियों के साथ रावण की प्रतिमा का विसर्जन करने की तैयारी कर रहे थे, लंकेश घर से निकले ही थे कि अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे वहीं गिर पड़े। परिवार और स्थानीय लोग उन्हें तुरंत पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लंकेश के निधन की खबर फैलते ही पाटन और जबलपुर में शोक की लहर दौड़ गई। रावण भक्ति को एक परंपरा के रूप में स्थापित करने वाले लंकेश की याद हमेशा लोगों के बीच बनी रहेगी। वही रावण की मौत के बाद स्थानीय लोग कर रहे हैं रावण की तारीफ।
50 साल पहले की थी रावण की मूर्ति स्थापित।
लंकेश ने आज से 50 साल पहले यानी साल 1975 में पहली बार पाटन में रावण की मूर्ति स्थापित कर पूजा शुरू की थी। यही नहीं लंकेश हर साल नवरात्र पर रावण की विशेष पूजा-अर्चना करते थे। लंकेश का मानना था कि, रावण कोई खलनायक नहीं बल्कि महान ज्ञानी और बुद्धिमान शासक थे। यही कारण था कि धीरे-धीरे उनके परिवार और आसपास के लोग भी रावण पूजा में शामिल होने लगे।

