जबलपुर, मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया है, हाई कोर्ट ने सरकार और सभी याचिकाकर्ता शिक्षकों से हलफनामे में जवाब पेश करने के लिए कहा है। हाई कोर्ट ने कहा है कि, सभी याचिकाकर्ता शिक्षक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि, उन्हें ई अटेंडेंस लगाने में क्या दिक्कत हो रही है। हाई कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या उन्होंने ई-अटेंडेंस लगाने का प्रयास किया है, यदि प्रयास किया तो उन्हें किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है। हाई कोर्ट ने सरकार से उन तमाम स्कूलों का आंकड़ा मांगा है जिन स्कूलों के शिक्षकों ने याचिका दायर कर ई-अटेंडेंस लगाने में परेशानी बताई है। साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार से याचिकाकर्ताओ के स्कूलों में ही दूसरे कर्मचारियों की अटेंडेंस के बारे में भी जानकारी मांगी है क्या उन्हें भी ई अटेंडेंस लगाने में दिक्कत हो रही है। अब इसी के साथ हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है।
प्रदेश में सरकारी स्कूलों अनिवार्य है यह अटेंडेंस
आपको बता दे कि पिछले दिनों में मध्य प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों की शिक्षा में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से ई अटेंडेंस अनिवार्य किया था जिसके बाद ज्यादातर शिक्षकों ने अटेंडेंस लगाना भी शुरू कर दिया है। लेकिन जबलपुर सहित प्रदेश के कुछ जिलों के शिक्षकों ने ईअटेंडेंस लगाने में असमर्थता जाहिर की है।
याचिका में इस तरह के बिंदु...
कई शिक्षकों के पास स्मार्टफोन नहीं है
प्रतिमा डाटा पैक खरीदना पड़ेगा
प्रतिदिन मोबाइल की बैटरी चार्ज रखना पड़ेगा
स्कूल में नेटवर्क कनेक्टिविटी समस्या रहती है
एप में सर्वर की समस्या और चेहरा मिलन की भी समस्या है
उच्च अधिकारी अटेंडेंस लगाने पर वेतन काटने की बात कह रहे हैं
स्कूल में पहले की तरह रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने की मांग
या फिर बायोमेट्रिक मशीन लगाए
जबलपुर की शिक्षिका की आपत्ति
ऐप डाउनलोड कर मेरी लोकेशन और फोटो का एक्सेस देना निजता के अधिकार का उल्लंघन है
मेरा निजी मोबाइल हर समय मेरे पास नहीं रहता, कभी-कभी मुझे बेटी की पढ़ाई के लिए मोबाइक घर पर छोड़ना पड़ता है
मेरे प्रोफाइल में मोबाइल की सिम और आधार कार्ड से बैंक खाता लिंक है जिसके एक्सेस देने से धोखाधड़ी की संभावना है
यदि शासन मुझे अलग से मोबाइल और सिम लेता है तो उसे पर ऐप डाउनलोड किया जा सकता है
कुक बिंदुओं के आधार पर एक याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधिन है

